कार्यक्रमों के मानक एवं दिशा निर्देश


 डा0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के मानक 
 1- सम्पर्क मार्ग निर्माण 
  • इस कार्यक्रम के अन्तर्गत चयनित ग्राम की 250 या उससे अधिक आबादी वाली समस्त बसावटें पक्के सम्पर्क मार्ग से सिंगल कनेक्टिविटी (Single Connectivity) के आधार पर जोड़ी जायेंगी।

  • 500 या उससे अधिक आबादी वाली ऐसी बसावटें, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत आच्छादित हों, को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत जोड़ा जायेगा।

  • अन्य बसावटों के सम्बन्ध में विभिन्न विभागों यथा कृषि विपणन एवं गन्ना विकास विभाग आदि द्वारा संचालित योजनाओं के अन्तर्गत निर्मित हो सकने वाले मार्गों को प्राथमिकता पर उन योजनाओं में आच्छादित करते हुए अवशेष बची बसावटों हेतु बजट की व्यवस्था लोक निर्माण विभाग द्वारा कराई जायेगी।

  • जिन बसावटों को जोड़ने में 40 प्रतिशत या अधिक अनु0जाति/जनजाति की आबादी लाभान्वित होती हो, उनके बजट की व्यवस्था स्पेशल कम्पोनेंट प्लान (एस0सी0पी0) के अन्तर्गत की जाएगी।

  • यदि किसी बसावट को जोड़ने वाला सम्पर्क मार्ग अन्य ग्राम/ग्रामों के भीतर होकर जाता है, तो ऐसी दशा में वह मार्ग अन्य ग्राम/ग्रामों की आबादी के भीतर भी प्रवेश करेगा और ऐसा होने पर आबादी वाले भाग में भी सम्पर्क मार्ग का निर्माण कराया जायेगा।

  • इस कार्य हेतु कार्यदायी संस्था सामान्यतः लोक निर्माण विभाग होगा। परन्तु विशेष परिस्थितियों में यदि कार्य की अधिकता के कारण लोक निर्माण विभाग के जिला स्तर पर उपलब्ध खण्ड निर्धारित समयावधि में इस कार्य को पूर्ण करने में असमर्थ हों, तो जिलाधिकारी द्वारा निर्णय लेकर कतिपय कार्यों हेतु ग्रामीण अभियन्त्रण सेवा विभाग को भी कार्यदायी संस्था बनाया जा सकेगा।

  • इस कार्यक्रम हेतु लोक निर्माण विभाग नोडल विभाग होगा।

2- ग्रामीण विद्युतीकरण

  • इस कार्यक्रम के अन्तर्गत चयनित ग्राम की 500 या उससे अधिक आबादी वाली समस्त बसावटों को विद्युतीकृत एवं ऊर्जीकृत किया जायेगा।

  • भारत सरकार द्वारा संचालित राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना-प्प् के अद्यतन मानकों के अनुसार विद्युतीकरण किये जाने पर ग्राम को संतृप्त माना जायेगा।

  • राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना- II से आच्छादित जनपदों से भिन्न जनपदों में संतृप्तीकरण हेतु बजट की व्यवस्था ऊर्जा विभाग द्वारा करायी जायेगी।

  • जिन बसावटों के विद्युतीकरण से 40 प्रतिशत या उससे अधिक अनु0जाति/जनजाति की आबादी लाभान्वित होती हो, उनके बजट की व्यवस्था स्पेशल कम्पोनेंट प्लान (एस0सी0पी0) के अन्तर्गत की जायेगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु ऊर्जा विभाग नोडल विभाग होगा।

राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना-2 के  मानक-

भारत सरकार द्वारा ग्राम में विद्युत की पहुॅच हो जाने पर ग्राम संतृप्त माना जायेगा, यदि -

  • ग्राम में मूलभूत सुविधाएं यथा डिस्ट्रीब्यूशन लाइन्स उस ग्राम के आबाद क्षेत्र एवं उसकी दलित बस्ती/मजरा तक (यदि कोई हो) पहॅुच जाए।

  • उस ग्राम के सार्वजनिक स्थलों जैसे स्कूल, पंचायत कार्यालय, स्वास्थ्य उपकेन्द्र एवं सामुदायिक केन्द्र में विद्युत सुविधा की पहुंच उपलब्ध करा दी जाय।

  • उस ग्राम के कुल परिवारों के 10 प्रतिशत परिवार विद्युतीकृत हो जाए। 

3- आन्तरिक गलियों एवं नालियों का निर्माण

  • इस कार्यक्रम के अन्तर्गत चयनित ग्राम की बसावटों की आन्तरिक गलियों में सी0सी0 रोड के साथ नाली या के0सी0 डेन का निर्माण कराया जाएगा।

  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 2000 तक की आबादी वाले ग्राम में रु0 20 लाख, 2001 से 5000 तक की आबादी वाले ग्रामों में रु0 30 लाख तथा 5001 या अधिक आबादी वाले ग्रामों में रु0 40 लाख की सीमा तक व्यय कर आन्तरिक गलियों का निर्माण कराया जा सकेगा।

  • श्रमांश यथा संभव मनरेगा योजना के अन्तर्गत अतिरिक्त रूप से लिया जायेगा।

  • ग्राम स्तर पर विभिन्न योजनाओं यथा राज्य वित्त आयोग एवं तेरहवां वित्त आयोग के अन्तर्गत उपलब्ध धनराशि से उपर्युक्त निर्धारित सीमा की न्यूनतम 5 प्रतिशत धनराशि का योगदान अतिरिक्त रूप से दिये जाने पर ही उपर्युक्त धनराशि व्यय की जा सकेगी। शासनादेश दिनांक  22 मई,2013 द्वारा उपरोक्त शर्त समाप्त कर दी गयी है।

  • इस कार्यक्रम हेतु बजट की व्यवस्था पंचायती राज विभाग द्वारा करायी जायेगी।

  • जिन गलियों के निर्माण से 40 प्रतिशत या अधिक अनु0जाति/ जनजाति की आबादी लाभान्वित हो, उनके बजट की व्यवस्था स्पेशल कम्पोनेंट प्लान (एस0सी0पी0) के अन्तर्गत की जायेगी।

  • जिन गलियों में दोनों तरफ आबादी है और मार्ग की चैड़ाई 3 मीटर या उससे अधिक है वहां दोनों ओर नाली/के0सी0डेन बनायी जायेगी।  अन्य गलियों में स्थलीय आवश्यकतानुसार नाली/के0सी0डेन बनायी जायेगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु गोरखपुर व वित्रकूट मण्डल में लोक निर्माण विभाग तथा शेष मण्डलों में ग्रामीण अभियन्त्रण सेवा विभाग होंगे। (शासनादेश दिनांक  01 नवम्बर, 2012 तथा शासनादेश दिनांक  19 फरवरी, 2013 एवं शासनादेश दिनांक  24 अप्रैल, 2013 द्वारा लोक निर्माण विभाग को आवंटित मण्डलों को भी ग्रामीण अभियन्त्रण विभाग को आवंटित कर दिया गया है।

  • ग्राम में नालियों से जल निकासी सुनिश्चित करने हेतु सी0सी0 रोड/नाली निर्माण से पूर्व ग्राम की समस्त गलियों का एक ढ़लान मानचित्र (स्लोप मैप) तैयार कर लिया जाय। इसके पश्चात सी0सी0 रोड/नाली का निर्माण इस प्रकार कराया जाय कि निर्मित की गयी समस्त नालियों से पानी निकासी सुनिश्चित हो सके।

  • कुल उपलब्ध धनराशि से यदि समस्त गलियों में सी.सी. रोड एवं नाली या के.सी. ड्रेन का निर्माण नहीं हो सकता है तो जिन गलियों में कार्य कराया जाना हो, उनका चयन उस राजस्व ग्राम से संबंधित ग्राम पंचायत की खुली बैठक में किया जायेगा।

  • इस कार्यक्रम के अन्तर्गत चयनित ग्राम की समस्त बसावटों को भारत सरकार के सम्पूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम के मानकों के अनुसार संतृप्त किया जायेगा। 

  • इस कार्यक्रम हेतु पंचायती राज विभाग नोडल विभाग होगा।

सम्पूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम (निर्मल भारत अभियान) के मानक -

  • सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान का नाम एवं योजना का स्वरूप परिवर्तित कर वर्ष 2012 से निर्मल भारत अभियान प्रारम्भ किया गया है।  निर्मल भारत अभियान के अन्तर्गत व्यक्तिगत शौचालयों, स्कूल शौचालयों, आंगनवाड़ी शौचालयों, सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया जाता है तथा बेकार ठोस एवं तरल पदार्थों के उचित निस्तारण की व्यवस्था का भी प्रावधान है। यह अभियान मांग आधारित है। वर्तमान में व्यक्तिगत शौचालय की अनुमानित लागत ` 10,000 ( केन्द्रांश ` 3200, राज्यांश ` 1400, मनरेगा अंश ` 4500 एवं लाभार्थी अंश ` 900 ) निर्धारित की गयी है। कार्यक्रम के तहत गरीबी रेखा के नीचे के परिवार व गरीबी रेखा के ऊपर के परिवारों में समस्त अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के परिवार, लघु एवं सीमान्त किसान, वासभूमि के साथ भूमिहीन किसान, शारीरिक रूप से विकलांग परिवार व महिला प्रमुख परिवारों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जायेगा। अन्य परिवार स्वयं के संसाधन से शौचालय का निर्माण करेंगे।

  • वर्ष 2006 से पूर्व निर्मित स्कूलों मे स्कूल शौचालयों का निर्माण निर्मल भारत अभियान के अन्तर्गत किया जाता है। 100 बच्चों पर एक यूनिट शौचालय बालकों एवं एक यूनिट शौचालय बालिकाओं हेतु अलग-अलग होगा तथा 100 से अधिक की दशा में बच्चों की संख्या के आधार पर अतिरिक्त शौचालय यूनिट की मांग की जा सकती है। एक यूनिट में एक शौचालय एवं दो मूत्रालयों का निर्माण किया जाता है जिसकी अनुमानित लागत ` 35000 ( केन्द्रांश ` 24500, राज्यांश ` 10500 ) होती है। सरकारी भवनों में चल रहे आंगनवाड़ी केन्द्रों में बालमैत्रिक आंगनवाड़ी शौचालयों का निर्माण कराया जाना है जिसकी अनुमानित लागत ` 8000 (केन्द्रांश ` 5600 एवं राज्यांश ` 2400) होती है। अभियान के अन्तर्गत आवश्यकतानुसार सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाता है जिसकी इकाई लागत ` 2.00 लाख (केन्द्रांश ` 1,20,000, राज्यांश ` 60,000, समुदाय का अंश `20,000) होती है। अपशिष्ट प्रबंधन हेतु परिवार की संख्या के आधार पर वित्तीय सहायता का निर्धारण ग्राम पंचायतवार किया गया है।  इस घटक के तहत कम्पोस्ट पिट, वर्मी कम्पोस्ट, सार्वजनिक व निजी बायोगैस संयंत्र, कम लागत वाली निकासी, सीवेज चैनल, अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग, घरेलू कचरे को अलग-अलग कर उसका निपटान करने जैसे कार्य किये जा सकते हैं। 150 परिवारों तक अधिकतम ` 07.00 लाख, 151 से 300 तक अधिकतम ` 12.00 लाख, 301 से 500 तक अधिकतम ` 15.00 लाख एवं 500 से अधिक अधिकतम ` 20.00 लाख (केन्द्रांश  70 प्रतिशत एवं राज्यांश 30 प्रतिशत ) होती है।

  • वर्तमान में जिलों द्वारा ग्राम पंचायतों का बेसलाइन सर्वे कराया गया है। उपर्युक्त मानकों के अनुसार बेसलाइन सर्वे में सभी प्रस्तावित कार्य शामिल किए गए हैं। कार्ययोजना तैयार करने हेतु बेसलाइन सर्वे का उपयोग किया जाना चाहिए। यदि किसी ग्राम का सर्वे न हुआ हो, तो सर्वे कराकर कार्ययोजना तैयार करायें। 

4- आवासहीन को आवास उपलब्ध कराना -

इस कार्यक्रम के अन्तर्गत चयनित ग्राम को भारत सरकार द्वारा संचालित इन्दिरा आवास योजना के मानकों / लोहिया ग्रामीण आवास योजना के मानक अनुसार संतृप्त किया जायेगा।  

इन्दिरा आवास योजना के मानक-

इस योजना के अन्तर्गत बी0पी0एल0 सर्वे-2002 की स्थायी पात्रता सूची के क्रमानुसार पात्र परिवारों को इन्दिरा आवास उपलब्ध कराया जायेगा। ग्राम व मजरों के सभी पात्र व्यक्तियों को आवास उपलब्ध करा देने पर ग्राम इस कार्यक्रम से संतृप्त माना जाएगा।

 लोहिया ग्रामीण आवास योजना के मानक-

ग्रामीण अनुसूचित जाति/जनजाति एवं सामान्य जाति (अन्य पिछड़ा वर्ग को सम्मिलित करते हुए )के ऐसे ग्रामीण परिवारों को, निःशुल्क आवास उपलब्ध कराया जाना है, जो आवासहीन हैं व जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय रु0 36,000/- से कम है तथा 2002 में तैयार की गयी बी0पी0एल0 सूची में उनका नाम न होने के कारण वे इन्दिरा आवास योजना के अन्तर्गत पात्रता श्रेणी में नहीं आते हैं, चिन्हित समग्र ग्रामों में ऐसे लक्षित परिवारों को लाभान्वित किया जायेगा।

5- स्वच्छ पेयजल आपूर्ति -

  • चयनित ग्राम को राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एन0आर0डी0डब्ल्यू0पी0) के अधीन पेयजल संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैण्ड पम्पों के अधिष्ठापन अथवा पाईप पेयजल योजनाओं का निर्माण मानकानुसार कराकर स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की जाएगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु ग्राम्य विकास विभाग नोडल विभाग होगा।

हैण्डपम्प स्थापना का मानक -

  • 100 की आबादी तथा दो हैण्डपम्पों के बीच 75 मीटर की दूरी के निर्धारित मानक के आधार पर ग्राम संतृप्त किया जायेगा। यदि ग्राम पेयजल में गुणवत्ता की समस्या से प्रभावित हो, तो ग्राम की समस्त आबादी को पाइप पेयजल योजना, अधिक गहरे हैण्डपम्पों अथवा शोधन संयंत्रों से शुद्व पेयजल उपलब्ध करा दिया गया हो, तभी ग्राम को संतृप्त माना जाएगा।

  • इस कार्यक्रम हेतु ग्राम्य विकास विभाग नोडल विभाग होगा।

6- तालाबों के जीर्णोंद्धार का मानक -

  • चयनित ग्राम की सीमा में पूर्व से तालाब उपलब्ध होने की दशा में किसी एक उपयुक्त तालाब का मनरेगा योजना के अन्तर्गत जीर्णोंद्धार किया जायेगा।

  • तालाब के चारों तरफ छायादार वृक्षों को लगाया जायेगा ।

  • चिन्हित ग्राम पंचायत में जिन तालाबों का जीर्णोंद्वार किया जाना है, उनके लिए कोई एक मानक तय किया जाना उचित नहीं होगा, क्योंकि प्रत्येक पंचायत मंे तालाब का सुदृढ़ीकरण किस स्तर तक किया जाना है, यह पूर्व निर्धारित नहीं किया जा सकता। अतएव ग्रामों के तालाबों के जीर्णोंद्वार हेतु स्वीकृत किये गये प्राक्कलन (इस्टीमेट) के अनुसार यदि समस्त कार्य कर लिया गया हो, तो उसे संतृप्त समझा जाएगा।

  • इस कार्यक्रम हेतु ग्राम्य विकास विभाग नोडल विभाग होगा।

7- प्राथमिक विद्यालय की स्थापना/ निर्माण के मानक

  • चयनित ग्राम में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर सर्व शिक्षा अभियान के मानकानुसार प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना एवं भवन निर्माण कराकर संतृप्त किया जाएगा।  

  • विद्यालयों में मानक के अनुसार अध्यापकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी।

  • कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के सम्बन्ध में ऐसी बस्ती में विद्यालय स्थापित किया जाएगा, जिसके 1 कि0मी0 की दूरी के अन्तर्गत कोई विद्यालय नहीं है तथा न्यूनतम आबादी 300 है।

8- उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना/ निर्माण

  • चयनित ग्राम में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर सर्व शिक्षा अभियान के मानकानुसार उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना एवं भवन निर्माण कराकर संतृप्त किया जाएगा।  

  • विद्यालयों में मानक के अनुसार अध्यापकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी।

  • उपर्युक्त कार्यक्रमों हेतु बेसिक शिक्षा विभाग नोडल विभाग होगा।

सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना/निर्माण के मानक -

  • कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों के सम्बन्ध में ऐसी बस्ती में विद्यालय स्थापित किया जाएगा, जिसके 3 कि0मी0 की दूरी के अन्तर्गत कोई विद्यालय नहीं है तथा न्यूनतम आबादी 800 है।

9- माध्यमिक विद्यालय की स्थापना/ निर्माण

  • चयनित ग्राम को मानकों के अनुसार कक्षा 910 की शिक्षा की सुविधा से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत संतृप्त किया जाएगा।

  • इस योजना में कक्षा 10 तक के बच्चों की शिक्षा हेतु पांच किलोमीटर की दूरी पर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना/निर्माण किया जायेगा।

  • विद्यालय में आावश्यकतानुसार शौचालयों (महिला/पुरूष) का निर्माण कराया जायेगा।

  • विद्यालय में पेयजल सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।

  • विद्यालय में विद्युत व्यवस्था उपलब्ध करायी जायेगी।

  • विद्यालय में विज्ञान प्रयोगशाला, प्रयोगशाला उपकरण, प्राचार्य कक्ष, स्टाफ कक्ष, बालिका कार्यकलाप कक्ष, कम्प्यूटर कक्ष, पुस्तकालय, मानकानुसार खेल का मैदान आदि सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी।

  • उपर्युक्त कार्यक्रम हेतु माध्यमिक शिक्षा विभाग नोडल विभाग होगा।

विभाग के शासनादेश दिनांक 31 जनवरी 2014 के द्वारा माघ्यमिक विद्यालयों की स्थापना,  कार्यक्रम को योजना के कार्यक्रमों से पृथक कर दिया गया है।

10- स्वास्थ्य उपकेन्द्र की स्थापना/निर्माण के विभागीय मानक

  • वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर चयनित ग्राम को विभागीय मानकों के अनुसार स्वास्थ्य उपकेन्द्र से संतृप्त किया जायेगा। 

  • यदि चयनित ग्राम ऐसे उपकेन्द्र से जुड़ा है, जिस पर पूर्व से ही सम्बद्व जनसंख्या 5000 से अधिक है तो एक अतिरिक्त उपकेन्द्र इस प्रकार स्थापित किया जाएगा कि जिस उपकेन्द्र से चयनित ग्राम जुड़ा हो, उससे सम्बद्व जनसंख्या 5000 से अधिक न हो। 

  • इस कार्यक्रम हेतु बजट की व्यवस्था एन0आर0एच0एम0 (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन) कार्यक्रम के अन्तर्गत चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा करायी जायेगी।

  • वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर इस योजना से आच्छादित करने हेतु चयनित ग्रामों को विभागीय मानकों के अनुसार स्वास्थ्य उपकेन्द्र से संतृप्त किया जायेगा। 

  • यदि चयनित ग्राम ऐसे उपकेन्द्र से जुड़ा है, जिस पर पूर्व से ही सम्बद्व जनसंख्या 5000 से अधिक है तो एक अतिरिक्त उपकेन्द्र इस प्रकार स्थापित किया जाएगा कि जिस उपकेन्द्र से चयनित ग्राम जुड़ा हो, उससे सम्बद्व जनसंख्या 5000 से अधिक न हो। 

  • जनसंख्या का मानक मैदानी क्षेत्र के ग्रामीण जनसंख्या के लिए है। जनजाति, पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों के ग्रामीण जनसंख्या हेतु भारत सरकार द्वारा 3000 की जनसंख्या का मानक निर्धारित किया गया है।  तद्नुसार इन क्षेत्रों में इस मानक के अनुसार स्थापना की कार्यवाही की जाएगी। यदि चयनित ग्राम में पूर्व से ही उपकेन्द्र स्थापित है तथा किराये के भवनों में संचालित है एवं इसके भवन निर्माण के लिए किसी भी योजना के अन्तर्गत स्वीकृति जारी न हुई हो, तो उसके निर्माण हेतु महानिदेशालय द्वारा समय-समय पर जारी भूमि चयन के निर्देशो के अनुसार भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। संक्षेप में भूमि चयन ऐसे स्थान पर होना चाहिए जो कि पहुंच मार्ग से युक्त हो, आबादी के अन्दर/निकट हो तथा गढढे आदि भराव वाले इलाके में न हो।

  • इस कार्यक्रम हेतु चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा।

विभाग के शासनादेश दिनांक 31 जनवरी 2014 के द्वारा  इस कार्यक्रम को योजना के कार्यक्रमों से पृथक कर दिया गया है।

11- आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थापना/निर्माण के मानक -

  • चयनित ग्राम में मानक के अनुसार आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थापना की जायेगी। 

  • यदि आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन हेतु सरकारी भवनों की समुचित व्यवस्था नहीं है, तो वहां आंगनवाड़ी केन्द्र/केन्द्रों हेतु भवन निर्माण की व्यवस्था की जाएगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु बजट की व्यवस्था महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा करायी जायेगी।

  • जिन केन्द्रों की स्थापना/निर्माण से 40 प्रतिशत या अधिक अनुसूचित जाति/जनजाति की आबादी लाभान्वित होती हो, उनके बजट की व्यवस्था स्पेशल कम्पोनेंट प्लान (एस0सी0पी0) के अन्तर्गत की जायेगी।

  • वर्तमान में संचालित समस्त आॅगनबाड़ी केन्द्र क्रियाशील हो। आॅंगनबाड़ी केन्द्रों की क्रियाशीलता सुनिश्चित करने का दायित्व जिलाधिकारी/ जिला कार्यक्रम अधिकारी का होगा।

  • समग्र ग्रामों की आबादी का परिशीलन कर 2001 की जनसंख्या के आधार पर आबादी के क्रम में ग्रामों की सूची बनाकर यह सुनिश्चित किया जायेगा कि 800 से 1000 की आबादी पर कम से कम 1 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित/क्रियाशील है।

  • अत्यन्त आवश्यकता की स्थिति में 800 से 1600 की आबादी पर एक अतिरिक्त आंगनबाड़ी केन्द्र की स्थापना पर विचार किया जाए।

  • नये आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थापना का प्रस्ताव पे्रषित करते समय निम्न बिन्दुओं का संज्ञान विशेष रूप से लिया जाए ः-

  • आबादी में संचालित आॅगनबाड़ी केन्द्रों पर अनुमन्य सुविधाओं के सापेक्ष शत-प्रतिशत लाभ लाभार्थियों द्वारा प्राप्त किया जा रहा है।

  • वर्तमान केन्द्र की प्रास्थिति यदि इस प्रकार है कि ग्राम की अन्य आबादी को केन्द्र पर अनुमन्य सुविधाओं का लाभ प्रदान किया जा सकता है तो उक्त ग्राम में नये आॅगनबाड़ी केन्द्र की स्थापना प्रस्तावित करने के स्थान पर वर्तमान केन्द्र की क्षमताओं का शत-प्रतिशत सदुपयोग किया जाए।

  • इस कार्यक्रम हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग नोडल विभाग होगा।

आंगनबाड़ी केन्द्रों  भवन निर्माण के मानक -

दिनांक 01.04.2013 को संचालित ऐसे आॅगनबाड़ी केन्द्रों को उनके भवन निर्माण के लिए चिन्हित किया जाए जो किसी शासकीय भवन में नहीं चल रहे हैं तथा जिनके भवन निर्माण का कार्य किसी अन्य शासकीय योजना में कराया जाना सम्मिलित नहीं है। भवन निर्माण हेतु आवश्यक भूमि व लागत के मानक निम्न प्रकार हैं -

(1) क्षेत्रफलः-

ग्रामीण क्षेत्रों में 200 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता होगी। आॅगनबाड़ी केन्द्रों का निर्माण 44.93 वर्ग मीटर (483.45 वर्गफुट) क्षेत्रफल में मानकीकृृत नक्शे के अनुसार किया जायेगा। आॅगनबाड़ी केन्द्रों के निर्माण कार्य हेतु छोटे बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से चिन्हित भूमि, बस्ती के मध्य अथवा नजदीक होनी आवश्यक है।

(2) लागतः-

1.       साधारण मृदा हेतु  रु0 4.23 लाख

2.       काली मृदा हेतु    रु0 4.54 लाख

3.       लवणयुक्त मृदा हेतु रु0 4.70 लाख

12- वैकल्पिक विद्युत व्यवस्था

  • चयनित ग्राम की ऐसी अविद्युतीकृत बसावटें, जो 500 से अधिक आबादी की हों तथा जिनकी दूरी ग्रिड से 3 कि0मी0 से अधिक हो, को ऊर्जा विभाग द्वारा अनापत्ति प्रदान किये जाने की दशा में भारत सरकार की रिमोट विलेज इलैक्ट्रिफिकेशन योजना के अन्तर्गत वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत से विद्युतीकृत किया जायेगा।

  • इस कार्यक्रम हेतु अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग नोडल विभाग होगा।

  • चयनित ग्राम की 500 से अधिक आबादी की ऐसी अविद्युतीकृत बसावटों, जिनमें ग्रिड के माध्यम से विद्युतीकरण संभव नहीं है एवं जो राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना से आच्छादित नहीं हैं तथा जिनकी दूरी ग्रिड से 3 कि0मी0 से अधिक हो, को ऊर्जा विभाग द्वारा अनापत्ति प्रदान किये जाने की दशा में भारत सरकार की रिमोट विपेज इलैक्ट्रिफिकेशन योजना के अन्तर्गत अक्षय ऊर्जा स्रोतों से विद्युतीकृत किया जाएगा।

13- वैकल्पिक मार्ग प्रकाश व्यवस्था

  • चयनित ग्राम में सोलर स्ट्रीट लाईट के माध्यम से मार्ग प्रकाश की व्यवस्था संबंधित जिला योजना के अन्तर्गत स्वीकृत एवं विभागीय मानकों के अनुसार की जायेगी।

  • चयनित ग्राम में सोलर स्ट्रीट लाईट के माध्यम से मार्ग प्रकाश की व्यवस्था संबंधित जिला योजना के अन्तर्गत स्वीकृत एवं विभागीय मानकों (प्रति 30 घर पर एक सोलर स्ट्रीट लाईट) के अनुसार की जाएगी।

  • मार्ग प्रकाश हेतु सी0एफ0एल0 आधारित सोलर स्ट्रीट लाईट संयंत्रों की स्थापना की जाएगी ।

  • सोलर स्ट्रीट लाईट संयंत्रांे की स्थापना हेतु ग्राम सभा की खुली बैठक में ग्राम्य विकास, ग्राम पंचायत एवं यूपीनेडा के समक्ष छाॅव रहित सुरक्षित सार्वजनिक स्थल का चयन किया जायेगा।

  • इस कार्यक्रम हेतु अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग नोडल विभाग होगा।

14- महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी कार्यक्रम के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम में इच्छुक व्यक्तियों को जाॅब कार्ड उपलब्ध कराकर मनरेगा के मानकों के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना मांग आधारित योजना है। अतएव योजना का मानक निम्नवत है ः-

  • पंचायतों के जिन परिवारों द्वारा जाॅब कार्ड की माॅंग की गई है, उनके जाॅब कार्ड तैयार कर उपलब्ध करा दिये गये हैं।

  • जिन जाॅब कार्ड धारकों द्वारा जितने दिनों के लिए कार्य की मांग की जाएगी, उन सभी मांग के अनुसार कार्य उपलब्ध करा दिया जाएगा।

 15- स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना

  • चयनित ग्रामों में पात्र लाभार्थियों को भारत सरकार द्वारा संचालित स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना के दिशा-निर्देशों एवं मानकों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार सृजन हेतु लाभान्वित किया जायेगा। 

  • इस कार्यक्रम हेतु ग्राम्य विकास विभाग नोडल विभाग होगा।

16- राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन (एन0आर0एल0एम0) के विभागीय मानक

  • जमीनी स्तर पर निर्धनों की सशक्त एवं स्थायी संस्था बनाकर ग्रामीण परिवारों को लाभप्रद रोजगार एवं हुनरमंद मजदूरी रोजगार के अवसर प्राप्त करने में समर्थ बनाते हुए गरीबी को कम करते हुए उनकी आजिविका में निरन्तर आधार पर उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी कराना।

  • द्वितीय गे्रडिंग उत्तीर्ण स्वयं सहायता समूह उपलब्ध होने पर उसे ऋण दिला दिया जाए।

  • प्रथम ग्रेडिंग उत्तीर्ण स्वयं सहायता समूह उपलब्ध होने की दशा में उसे रिवाल्विंग फण्ड अवमुक्त करा दिया जाए।

  • नये स्वयं सहायता समूह गठित होने पर उसे रिवाल्विंग फण्ड उपलब्ध करा दिया जाए।

17- निःशुल्क बोरिंग कार्यक्रम -

  • प्रदेश के जनपदों के जिन विकासखण्डों में निःशुल्क बोरिंग कार्यक्रम संचालित किया जा रहा हैं, उन विकासखण्डों के चयनित राजस्व ग्रामों में निर्धारित विभागीय मानकांे के अनुसार पात्र एवं इच्छुक लाभार्थियों को निःशुल्क बोरिंग की सुविधा प्रदान की जायेगी।

  • अतिदोहित क्रिटिकल एवं ऐसे विकासखण्डांे, जहां योजना संचालित नहीं है, को छोड़कर डा0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के अन्तर्गत चयनित ग्रामों एवं उसकी सभी बसावटों में पात्र एवं इच्छुक लाभार्थियों को निर्धारित विभागीय मानकों के अनुसार निःशुल्क बोरिंग की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

  • चयनित ग्रामों एवं उसकी सभी बसावटों में सभी पात्र एवं इच्छुक कृषकों को निःशुल्क बोरिंग निर्माण हेतु विभाग द्वारा योजना में अनुमन्य अनुदान दिया जाएगा। यदि कार्य की लागत अनुमन्य अनुदान की सीमा से अधिक आती है तो शेष धनराशि लाभार्थी द्वारा स्वयं वहन की जाएगी।

  • निःशुल्क बोरिंग का निर्माण विभागीय प्रक्रिया एवं मार्ग-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

  • इस कार्यक्रम हेतु लघु सिंचाई विभाग नोडल विभाग होगा।

18- कृषि भूमि एवं सीलिंग से सरप्लस भूमि का आवंटन के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम में भूमि की उपलब्धता की दशा में पात्रता के क्रम में उपलब्ध लाभार्थियों को कृषि योग्य भूमि का आवंटन करते हुए विधिवत कब्जा दिलाया जाएगा।

  • उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1990 के अन्तर्गत कृषि योग्य/ सीलिंग में घोषित अतिरिक्त भूमि के वन्दोवस्त का दायित्व जिलाधिकारी पर है।

  • डा0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में आच्छादित ग्राम में जिलाधिकारी द्वारा कृषि योग्य/सीलिंग में घोषित अतिरिक्त भूमि का आवंटन सम्बन्धित अधिनियम में दी गयी व्यवस्था एवं समय-समय पर निर्गत नियमों/ शासनादेशों के अधीन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिमान क्रम में पात्र व्यक्तियों को किया जाना सुनिश्चित किया जाए।

  • इस कार्यक्रम हेतु राजस्व विभाग नोडल विभाग होगा।

19- आवास हेतु भूमि का आवंटन के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम में भूमि की उपलब्धता की दशा में पात्रता के क्रम में उपलब्ध लाभार्थियों को आवास योग्य भूमि का आवंटन अद्यतन विभागीय निर्देशों के अन्तर्गत करते हुए विधिवत कब्जा दिलाया जाएगा।

  • आवास स्थल आवंटन हेतु प्रदेश में अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्तियों, ग्रामीण शिल्पियों तथा खेतिहर मजदूरों, जिनके पास आवास हेतु भूमि नहीं है, को ग्राम समाज की भूमि समय-समय पर निर्गत शासनादेशों के अधीन निर्धारित प्रक्रियानुसार निःशुल्क उपलब्ध करायी जाए। जहां आवास आवंटन हेतु पात्र व्यक्ति हों और उस ग्राम में नियमानुसार ग्राम समाज की भूमि उपलब्ध न हो, वहाॅ अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार कर वांछित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

  • इस कार्यक्रम हेतु राजस्व विभाग नोडल विभाग होगा।

20- मछली पालन हेतु तालाब सुधार/तालाब का आवंटन कार्यक्रम

  • चयनित ग्राम में मत्स्य पालक विकास अभिकरण द्वारा इच्छुक लाभार्थियों को तालाब सुधार कार्यक्रम के अन्तर्गत आच्छादित किया जाएगा। निहित आवंटन योग्य तालाबों, मीनाशयों एवं पोखरों को मछली पालन हेतु विभागीय अद्यतन आदेशों के अन्तर्गत आवंटित किया जायेगा।

  • ग्राम में निहित तालाब/पोखरों, मीनाशयों एवं जल प्रणालियों के प्रबन्ध हेतु समय-समय पर निर्गत शासनादेशों के अन्तर्गत वरीयता क्रम में मछुआ सम्प्रदाय के अनुसूचित जाति/ जनजाति के व्यक्तियांे को जिले स्तर पर 10 वर्षीय पट्टे/ लीज पर दिये जाने की कार्यवाही नियमानुसार सुनिश्चित की जाए।

  • इस कार्यक्रम हेतु राजस्व विभाग व मत्स्य विकास विभाग नोडल विभाग होंगे।

 21- कुम्हारीकला हेतु भूमि का आवंटन

  • चयनित ग्राम में भूमि प्रबन्ध समिति के अधिकार क्षेत्र एवं प्रबन्ध में आने वाली ऐसी भूमि जहां कुम्हारी कार्य हेतु उपयुक्त मिट्टी उपलब्ध हो, का विभागीय अद्यतन आदेशों के अन्तर्गत पात्र लाभार्थियों को आवंटन किया जायेगा।

  • कुम्हारीकला हेतु भूमि का आवंटन के विभागीय मानक

  • कुम्हारी कला के प्रोत्साहन एवं कुम्हार जाति तथा इस व्यवसाय में लगे व्यक्तियों को मिट्टी प्राप्त करने हेतु प्रदेश के विभिन्न जनपदों मंे ऐसे ताल-पोखर व अन्य स्थल, जहां कुम्हारी कार्य हेतु उपयुक्त चिकनी मिट्टी उपलब्ध हो, का आवंटन कुम्हारी कार्य में लगे हुए व्यक्तियों/ परिवारों को शासनादेशों के अन्तर्गत किया जाए।

  • इस कार्यक्रम हेतु राजस्व विभाग नोडल विभाग होगा।

 22- कौशल विकास कार्यक्रम के विभागीय मानक

  • व्यवसायिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत संचालित कौशल विकास पहल (स्किल डेवलेपमेंट इनीशियेटिव) योजना के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्राम के पात्र एवं इच्छुक निवासियों को स्थानीय आवश्यकतानुसार अल्पकालीन रोजगारपरक व्यवसायिक/तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

  • योजनान्तर्गत वे अभ्यर्थी पात्र होंगे जो भारत सरकार की स्किल डेवलपमेंट इनीशिएटिव योजनान्तर्गत नामोदिष्ट सेक्टर/ माड्यूल में प्रवेश हेतु निर्धारित शैक्षिक/तकनीकी योग्यता रखते हों।

  • योजनान्तर्गत इच्छुक अभ्यर्थी उन्हें माना जायेगा जिनके द्वारा लिखित रूप से अपनी सहमति दी जाती है एवं प्रशिक्षण हेतु निर्धारित शुल्क जता कर दिया जाता है।

  • सफल घोषित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण एवं असेसमेंट शुल्क वापस कर दिया जायेगा।

  • ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने अनौपचारिक रूप से किसी व्यवसाय विशेष में कौशल प्राप्त किया हो तथा वे अब सीधे असेसमेंट एवं प्रमाणीकरण कराना चाहते हों, उन्हें भी पात्रता के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थी उसी दशा में माना जायेगा जब उनके द्वारा असेसमेंट हेतु निर्धारित शुल्क जमा कर दिया जाए।

  • यदि किसी ग्राम में उक्तानुसार पात्र एवं इच्छुक अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हो पाते हैं तो उस ग्राम को संतृप्त माना जाए एवं तद्नुसार सक्षम स्तर से प्रमाण-पत्र भी प्रेषित किया जाना होगा।

  • योजनान्तर्गत चयनित अभ्यर्थी को जनपद में निकटतम पंजीकृत वी0टी0पी0 में उपलब्ध/संचालित माड्यूलों में प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।

  • प्रशिक्षण एवं डायरेक्ट असेसमेंट हेतु अभ्यर्थी को जनपदीय नोडल प्रधानाचार्य, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान से सम्पर्क करना होगा।

  • इस कार्यक्रम हेतु व्यवसायिक शिक्षा विभाग नोडल विभाग होगा।

 23- बेरोजगारी भत्ता वितरण के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम में मानक के अनुसार पात्र एवं पंजीकृत बेरोजगार युवक एवं युवतियों को बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाएगा।

  • इस कार्यक्रम हेतु श्रम एवं सेवायोजन विभाग नोडल विभाग होगा।

  • इस योजनान्तर्गत उ0प्र0 बेरोजगारी भत्ता योजना-2012 में दी गयी अर्हता की शर्तों से आच्छादित 25 वर्ष से अधिक आयु के बेरोजगारों को 40 वर्ष की आयु पूर्ण होने के माह तक बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाना है। भत्ते की धनराशि     रु0 1000/- प्रतिमाह होगी।

  • इस योजनान्तर्गत प्रदेश के किसी भी सेवायेाजन कार्यालय मंे 31 अगस्त, 2012 तक पंजीकृत होने की दशा में बेरोजगार व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दिया जाना है।

  • बेरोजगार व्यक्ति के परिवार की समस्त स्रोतों से आय रु0 36000/- वार्षिक अथवा इससे कम होनी चाहिए। बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होनी चाहिए।

  • बेरोजगारी भत्ता योजना-2012 का क्रियान्वयन बेरोजगारी भत्ता नियमावली-2012 हेतु निर्गत कार्यालय ज्ञाप संख्या-670/ 36-5-2012-12(एम)/2012 दिनांक  15.05.2012 यथा संशोधित के अनुसार सुनिश्चित किया जाए।

  • इस कार्यक्रम हेतु प्रशिक्षण एवं सेवायोजन विभाग नोडल विभाग होगा।

 24- टैबलेट पी0सी0 एवं लैपटाप वितरण

  •  चयनित ग्राम में निर्धारित मानकों एवं अद्यतन विभागीय आदेशों के अनुसार पात्र छात्र/छात्राओं को टेबलेट पी0सी0 एवं लैपटाॅप का वितरण किया जाएगा।

  • इस योजनान्तर्गत प्रदेश में 10वीं पास छात्र/छात्राओं को निःशुल्क टेबलेट एवं 12वीं पास छात्र/छात्राओं को लैपटाप प्रदान किये जायेंगे।

  • ऐसे छात्र/छात्राएं, जो वर्ष 2012 में आयोजित उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद से हाईस्कूल परीक्षा, 0प्र0 माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद से पूर्व मध्यमा, 0प्र0 मदरसा शिक्षा परिषद से हाईस्कूल के समकक्ष मुंशी या मौलवी परीक्षा/सी0बी0एस0सी0/आई0सी0एस0सी0 से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण कर, कक्षा 11 व समकक्ष कक्षा में प्रवेश प्राप्त कर अध्ययनरत हों, मान्यता प्राप्त आई0टी0आई0/पाॅलीटेक्निक संस्थाओं में, जिनके पाठ्यक्रम में प्रवेश की न्यूनतम अर्हता हाईस्कूल अथवा समकक्ष हो, को प्रवेश प्राप्त कर अध्ययनरत हों, को निःशुल्क टेबलेट उपलब्ध कराये जायेंगे।

  • ऐसे छात्र/छात्राएं, जो वर्ष 2012 में आयोजित उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद से इण्टरमीडिएट परीक्षा, 0प्र0 माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद से उत्तर मध्यमा, 0प्र0 मदरसा शिक्षा परिषद से इण्टरमीडिएट के समकक्ष आलिम परीक्षा/ सी0बी0एस0सी0/आई0सी0एस0सी0 से बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण कर, उच्च शिक्षा हेतु उ0प्र0 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा मान्यता प्राप्त उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत हों, को निःशुल्क लैपटाप उपलब्ध कराये जायेंगे।

  • इस कार्यक्रम हेतु माध्यमिक शिक्षा विभाग नोडल विभाग होगा।

विभाग के शासनादेश दिनांक 31 जनवरी 2014 के द्वारा  इस कार्यक्रम को योजना के कार्यक्रमों से पृथक कर दिया गया है।

25- वृद्वावस्था/किसान पेंशन वितरण

  • चयनित ग्राम में विभागीय अद्यतन आदेशों के अनुसार योजनान्तर्गत पात्र समस्त व्यक्तियों को पेंशन प्रदान की जायेगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु समाज कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा।

वृद्वावस्था/किसान पेंशन वितरण के विभागीय मानक

  • वृद्धावस्था पेंशन योजनान्तर्गत वर्ष 2008-09 से बी0पी0एल0 सूची 2002 में सम्मिलित परिवारों के 60 वर्ष से अधिक आयु के समस्त वृद्धजनों को रु0 300/- प्रतिमाह की दर से वर्ष में दो बार छमाही किस्तों में धनराशि उपलब्ध करायी जाती है।

26- पति की मृत्यु के उपरांत निराश्रित महिलाओं को सहायक अनुदान वितरण के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम में विभागीय अद्यतन आदेशों के अनुसार योजनान्तर्गत पात्र समस्त महिलाओं को पेंशन प्रदान की जायेगी।

  • निराश्रित महिला की आयु 18 से 60 वर्ष के मध्य हो।

  • पुर्नविवाह न किया गया हो।

  • आवेदिका किसी ऐसी शासकीय संस्था की संवासिनी न हो, जहां उसका भरण-पोषण निःशुल्क किया जा रहा हो। (जनपद मथुरा-वृन्दावन में पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिलाओं हेतु संचालित आश्रय गृहों को छोड़कर)

  • लाभार्थी को शासन के किसी अन्य विभाग द्वारा वृद्वावस्था या अन्य कोई पेंशन अथवा शासकीय सहायता प्राप्त न हो रही हो।

  • निराश्रित महिला के आश्रित 18 वर्ष से कम आयु के वे पुत्र-पुत्री एवं पोते माने जायेंगे जो उस महिला पर पूर्णतया आश्रित हों।

सामान्य निर्देश -

(1) पेंशन की अस्वीकृति/निरस्त होने की स्थिति में जनपद के जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा लाभार्थी को लिखित रूप से अवगत कराया जायेगा।

(2) लाभार्थी गरीबी रेखा से नीचे हो अर्थात वे लाभार्थी जिनकी ग्रामीण क्षेत्र में रु0 19884/- वार्षिक आय हो।

(3) तहसीलदार द्वारा प्रदत्त आय प्रमाण-पत्र मान्य होगा। यदि लाभार्थी का नाम बी0पी0एल0 सूची, 2002 में अंकित है तो किसी आय प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं होगी, केवल बी0पी0एल0 सूची का क्रमांक तथा अन्य विवरण अंकित करना होगा।

(4) लाभार्थियों को पेंशन किश्तों में दी जाएगी।

(5) नवीन लाभार्थियों को स्वीकृत पेंशन की धनराशि स्वीकृति तिथि के अगले माह से देय होगी।

27- रानी लक्ष्मी बाई पेंशन योजना

  • चयनित ग्राम में विभागीय अद्यतन आदेशों के अनुसार योजनान्तर्गत पात्र समस्त व्यक्तियों को पेंशन प्रदान की जायेगी।

  • इस योजना में ऐसे गरीब परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, परन्तु उन्हें बी0पी0एल0 योजना, अन्त्योदय योजना या किसी भी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।

  • गरीबी रेखा के सम्बन्ध में औसत 5 सदस्यों के परिवार को आधार मानते हुए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में रु0 19884/- प्रति परिवार प्रति वर्ष की अधिकतम आय सीमा निर्धारित की गयी है।

  • इस योजना के अन्तर्गत कम से कम 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के परिवारों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जाए।

  • योजना के अन्तर्गत लाभार्थी मुख्य रूप से परिवार की महिला मुखिया को रखा जायेगा और महिला मुखिया न हो तो पुरूष मुखिया को लाभार्थी बनाया जा सकेगा।

  • इस योजना के अन्तर्गत चयनित लाभार्थी परिवारों को रु0 400 प्रतिमाह की दर से दो छमाही किश्तों मंे धनराशि उपलब्ध करायी जाएगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु समाज कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा। 

28- विकलांगजन पेंशन वितरण

  • चयनित ग्राम में विभागीय अद्यतन आदेशों के अनुसार योजनान्तर्गत पात्र समस्त व्यक्तियों को पेंशन प्रदान की जायेगी।

  • इस योजनान्तर्गत 40 प्रतिशत या उससे अधिक व्यस्क (मुख्य विकास अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक द्वारा प्रदत्त विकलांगता प्रमाण-पत्र, प्रत्यक्ष विकलांगताओं के लिए प्रशिक्षित निजी चिकित्सकों द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, मानसिक मन्दित तथा श्रवण बाधित विकलांगताओं के मामलो में राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय, गोमतीनगर, लखनऊ द्वारा प्रदत्त विकलांगता प्रमाण-पत्र भी मान्य) विकलांगजनों को रु0 300/- प्रतिमाह वर्ष में 6-6 माह की दो किश्तों (प्रथम किश्त माह अप्रैल से सितम्बर तथा दूसरी किश्त अक्टूबर से मार्च तक) पेंशन प्रदान की जाती है।

  • नवीन लाभार्थियों की पेंशन स्वीकृति अतिरिक्त बजट उपलब्ध होने अथवा रिक्त होने पर जनपद स्तर पर पंजीबद्व आवेदकों की पात्रता एवं वरीयता क्रम के आधार पर अनुमन्य की जाती है।

  • इस कार्यक्रम हेतु विकलांग कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा।

 29- अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रवृत्ति वितरण के विभागीय मानक

  • यनित ग्राम में विभागीय अद्यतन आदेशों के अनुसार पूर्वदशम् एवं दशमोत्तर के अध्ययनरत अनुसूचित जाति/जनजाति के समस्त छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी।

  • प्रदेश सरकार द्वारा कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत समस्त अनुसूचित जाति जनजाति के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

  • कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को देय छात्रवृत्ति के लिए पात्रता की कोई आय-सीमा प्रतिबंधित नहीं है।

  • कक्षा 910 में अध्ययनरत अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों को देय छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित आय-सीमा रू0 30000 प्रति वर्ष है।

  • कक्षा 10 के ऊपर की कक्षाओं में अध्ययनरत् अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा रू0 2,00,000/- तक के हैं, को दशमोत्तर छात्रवृत्ति भारत सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर प्रदान की जाती है।

  • इस कार्यक्रम हेतु अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा।

30- अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति वितरण के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम में विभागीय अद्यतन आदेशों के अनुसार पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मानक के अनुसार पूर्वदशम् एवं दशमोत्तर के छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी।

  • प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वदशम कक्षाओं में अध्ययनरत पिछड़े वर्ग के पात्र छात्र/छात्राओं को छात्र वृत्ति प्रदान की जाती है।

  • कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत समस्त पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

  • कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को देय छात्रवृत्ति के लिए पात्रता की कोई आय-सीमा प्रतिबंधित नहीं है।

  • कक्षा 910 में अध्ययनरत पिछडे+ वर्ग के छात्रों को देय छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित आय-सीमा रू0 30000 प्रति वर्ष है।

  • दशमोत्तर कक्षाओं में अध्ययनरत पिछड़े वर्ग के ऐसे सभी छात्र/छात्राओं को, जिनके माता-पिता/अभिभावकों की वार्षिक आय   रु0 2 लाख तक है, को भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा लागू दरों के अनुसार छात्रवृत्ति वितरित की जाती है।

  • इस कार्यक्रम हेतु पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा।

 31- गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सामान्य वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति वितरण के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम में विभागीय अद्यतन आदेशों के अनुसार पूर्वदशम् एवं दशमोत्तर के अध्ययनरत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सामान्य वर्ग के अभिभावकों के छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी।

  • गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सामान्य वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति वितरण हेतु विभागीय मानक

  • गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले सामान्य वर्ग के अभिभावकों, जिनकी वार्षिक आय प्रति परिवार रू0 19884/- (ग्रामीण क्षेत्र) हो, को कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों को निर्धारित दर के अनुसार छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

  • सामान्य वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के अन्तर्गत सामान्य वर्ग के छात्र/छात्राओं, जिनके अभिभावकांे की वार्षिक आय रूपया 2,00,000/- से अधिक न हा,े को निर्धारित दर के अनुसार छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

  • इस कार्यक्रम हेतु समाज कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा।

32- अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति वितरण के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम में विभागीय अद्यतन आदेशों के अनुसार पूर्वदशम् एवं दशमोत्तर के छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु अल्पसंख्यक कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा।

  • अल्पसंख्यक समुदाय के कक्षा 1 से 10 तक के ऐसे सभी छात्रो, जिनके अभिभावकों की अधिकतम वार्षिक आय रु0 1 लाख है, को निर्धारित दर के अनुसार पूर्वदशम छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

  • अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे सभी छात्रो, जिनके अभिभावकों की अधिकतम वार्षिक आय रु0 2 लाख है, को निर्धारित दर के अनुसार दशमोत्तर छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

33- पशुओं का टीकाकरण/कृत्रिम गर्भाधान के विभागीय मानक

  • चयनित ग्राम के समस्त छोटे पशुओं में गलाघोटूं और पी.पी.आर. बीमारियों से बचाव के लिए तथा समस्त बड़े पशुओं में गलाघोटूं और खुरपका-मुंहपका बीमारियों से बचाव के लिए निर्धारित शुल्क लेकर टीकाकरण किया जाएगा।

  • चयनित ग्राम के पशुओं के उत्पादन स्तर को बढ़ाने हेतु ग्राम के समस्त प्रजनन योग्य पशुओं को योजनान्तर्गत उन्नत प्रजनन आच्छादन हेतु कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

  • चयनित ग्राम के समस्त पशुओं में गला घोटू और खुरपका-मुंहपका बीमारियों से बचाव के लिए निर्धारित शुल्क लेकर टीकाकरण किया जायेगा।

  • चयनित ग्राम के पशुओं के उत्पादन स्तर को बढ़ाने हेतु ग्राम के समस्त प्रजनन योग्य पशुओं को योजनान्तर्गत उन्नत प्रजनन आच्छादन हेतु कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु पशुपालन विभाग नोडल विभाग होगा।

 

 34- आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति

  • चयनित ग्राम के समस्त परिवारों को विभागीय आदेशों के अन्तर्गत पात्रता के अनुरूप अन्त्योदय कार्ड, बी0पी0एल0 कार्ड अथवा ए0पी0एल0 कार्ड की उपलब्धता से संतृप्त किया जाएगा।

  • सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत अनुमन्य वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

  • योजना में चयनित ग्रामों हेतु ग्राम स्तरीय सर्वेक्षण टीम गठित कर राशन कार्ड से वंचित परिवारों की सूची तैयार की जाएगी।

  • डा0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में चयनित सभी ग्रामों के समस्त ऐसे परिवारों, जिन्हें वर्तमान में किसी श्रेणी का राशन कार्ड प्राप्त नहीं है, को विभागीय आदेशों के अन्तर्गत पात्रता के अनुरूप अन्त्योदय, बी0पल0एल0 अथवा ए0पी0एल0 राशन कार्ड उपलब्ध कराये जायेंगे।

  • ग्राम स्तरीय सर्वेक्षण टीम चयनित ग्राम में वर्तमान में जारी विभिन्न श्रेणी के कार्डों का सत्यापन एवं जाॅंच कर अपात्र परिवारों को जारी कार्ड निरस्त कर वास्तविक चिन्हित पात्र परिवारों को इसी संख्या के सापेक्ष अन्त्योदय/ बी0पी0एल0 कार्ड निर्गत करेंगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु खाद्य एवं रसद विभाग नोडल विभाग होगा।  

विभाग के शासनादेश दिनांक 31 जनवरी 2014 के द्वारा  इस कार्यक्रम को योजना के कार्यक्रमों से पृथक कर दिया गया है।

35- बीज प्रतिस्थापन दर कार्यक्रम के विभागीय दिशा-निर्देश

  • चयनित ग्राम में बीज प्रतिस्थापन दर को विभाग द्वारा निर्धारित मानक स्तर तक पहुंचाया जाएगा।

  • बीजों की बुवाई में प्रमाणित बीजों के प्रयोग को बीज प्रतिस्थापन कहते हैं। धान/गेहॅूं/जौं तथा समस्त दलहनी एवं तिलहनी फसलों के बीजों को बुवाई के लिए प्रत्येक तीन वर्षों पर प्रतिस्थापित (बदलना) किया जाना चाहिए।  जबकि ज्वार, बाजरा, मक्का, सूरजमुखी एवं राई/सरसों की फसलों के बीज प्रत्येक चार वर्ष में प्रतिस्थापित (बदलना) करना चाहिए। प्रतिस्थापित बीज की मात्रा को बीज प्रतिस्थापन दर (एस0आर0आर0)कहते हैं।

36- किसान क्रेडिट कार्ड वितरण

  • चयनित ग्राम में पात्र एवं इच्छुक कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड से शत-प्रतिशत आच्छादित किया जाएगा।

  • किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों को ऋण के वितरण हेतु व्यापक रूप से स्वीकृत ऋण प्रणाली है। सभी किसान कार्ड बनाने के लिए पात्र हैं। इसके अंतर्गत वित्तपोषण के नवीनतम मानदण्डों का उपयोग करते हुए फसल की किस्म और भूमि जोत के आधार पर ऋण की सीमा तय की जाती है, जबकि कार्ड जारी करने के लिए ऋण की कोई न्यूनतम सीमा नहीं है।

  • किसान क्रेडिट कार्ड की अधिकतम सीमा तीन लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें चक्रीय (Revolving) नकदी ऋण सुविधा, किसान की सुविधा के अनुसार आहरण और अदायगी की व्यवस्था की गई है। जरूरत के अनुसार बार-बार आहरण एवं अदायगी से किसानों पर ब्याज का कम बोझ पड़ता है और प्रत्येक आहरण में ली गई राशि की चुकौती अधिकतम 12 महीनों में की जा सकती है।

  • किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने हेतु प्रत्येक किसान को लगभग 1445 रु0 व्यय करना पड़ता है।

  • इस कार्यक्रम हेतु कृषि विभाग नोडल विभाग होगा।

37- मृदा परीक्षण कार्यक्रम

  • चयनित ग्राम के इच्छुक कृषकों को फसल विशेष हेतु उर्वरकों की सही मात्रा के निर्धारण, भूमि में उपलब्ध मुख्य/द्वितीय एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा ज्ञात करने तथा मृदा उर्वरता मानचित्र तैयार कर कृषकों को मार्गदर्शन देने हेतु मृदा परीक्षण की सुविधा निर्धारित शुल्क लेकर उपलब्ध करायी जायेगी।

  • इस कार्यक्रम हेतु कृषि विभाग नोडल विभाग होगा।

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2.डा0 अम्‍बेडकर ग्रामीण समग्र विकास योजना के अन्‍तर्गत चिन्हित कार्यक्रमों के संतृप्‍तीकरण के मानक 


 

1.

सम्पर्क मार्ग निर्माण - इस योजना के अन्तर्गत चयनित ग्रामसभा में आने वाले सभी राजस्व ग्रामों को पक्के सर्म्पक मार्ग से जोडा जाएगा तथा सभी राजस्व ग्रामों की सबसे बडी आबादी वाले अनुसूचित जाति/जनजाति वाले मजरे को सर्वऋतु सम्पर्क मार्ग से जोडे जाने पर ग्रामसभा सम्पर्क मार्ग से संतृप्त मानी जायेगी। सम्पर्क मार्ग का निर्माण उक्त मजरे की आबादी के प्रथम घर तक किया जायेगा, लेकिन यदि कोई सम्पर्क मार्ग कई ग्रामों को जोडता है (अर्थात सम्पर्क मार्ग थ्रू रूट प्रकृति का है) तो ऐसी दशा में वह मार्ग गांव की आबादी के भीतर प्रवेश करेगा और ऐसा होने पर आबादी वाले भाग में भी निर्माण का कार्य किया जायेगा।
इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन लोक निर्माण विभाग द्वारा सुनिश्चित कराया जायेगा।

वि‍भाग के शासनादेश दि‍नांक 11 जून 2008 के द्वारा वर्ष 2008- 09 में चयनि‍त डा0 अम्‍बेडकर ग्रामसभाओं में से प्रत्‍येक जनपद में दो मॉडल डा0 अम्‍बेडकर ग्राम सभाओं का चयन कर सम्‍पर्क मार्ग कार्यक्रम से नि‍म्‍नानुसार संत़प्‍त कि‍या जायेगा।
डा0 अम्‍बेडकर ग्रामसभा में सम्‍पर्क मार्ग र्नि‍माण के साथ साथ ग्राम सभा के अन्‍तर्गत आने वाले सभी गांव एवं मजरे सी0सी0 रोड से जोडे जायेंगे। सी0सी0 रोड, के सी डेन एवं अन्‍डर ग्राउन्‍ड डेन ग्राम सभा के हरेक ग्राम के हरेक मजरे में तो होंगी ही परन्‍तु हरेक मजरे एवं ग्राम को भी सी. सी. रोड , के सी डेन अन्‍डर ग्राउन्‍ड डेन अथवा सम्‍पर्क मार्ग से जोडा जायेगा। के. सी. डेन व अन्‍डरग्राउन्‍ड डेन की नि‍कासी ग्राम के तालाब में की जायेगी एवं आवश्‍यकतानुसार तालाब का गहरीकरण कि‍या जायेगा।

2.

ग्रामीण विद्युतीकरण - किसी भी गांव के विद्युतीकरण के मानक निम्न प्रकार होंगे -
(i) उस ग्राम में मूलभूत सुविधाएं यथा डिस्ट्रीब्यूशन लाइन्स उस ग्राम के आबाद क्षेत्र एवं उसकी दलित बस्ती/मजरे (जहां पर ऐसा मजरा हो) तक पहुंच जाए (वैकल्पिक ऊर्जा के लिए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रान्सफार्मर की आवश्यकता नहीं है।)

(ii) उस ग्राम के कुल परिवारों के 10 प्रतिशत परिवार विद्युतीकृत हो गये हों।

उपर्युक्त मानकों के अनुसार चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभा के सभी ग्राम विद्युत के पहुंच/आपूर्ति सुनिश्चित हो जाने पर ग्राम संतृप्त माना जाएगा।

वि‍भाग के शासनादेश दि‍नांक 11 जून 2008 के द्वारा वर्ष 2008- 09 में चयनि‍त डा0 अम्‍बेडकर ग्रामसभाओं में से प्रत्‍येक जनपद में दो मॉडल डा0 अम्‍बेडकर ग्राम सभाओं का चयन कर ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम से नि‍म्‍नानुसार संत़प्‍त कि‍या जायेगा। 

चयनि‍त माडल ग्राम सभाओं के अन्‍तर्गत आने वाले प्रत्‍येक गांव एवं मजरे का विद्युतीकरण कर सर्वाजि‍नक स्‍थलों जैसे स्‍कूल,पंचायत कार्यालय,एवं स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र दवाखाना एवं सामुदायि‍क केन्‍द्र में भी विद्युत आपूति की जाय। 

3.

खडन्जा/नाली निर्माण - योजनान्तर्गत चयनित ग्रामसभाओं के सभी ग्रामों एवं मजरों में सार्वजनिक मार्गो पर खडन्जा एवं खडन्जे के किनारे सामान्यतया एल "L" आकार की सीमेन्टेड नाली बनायी जाए। जिन रास्तों पर पानी का बहाव अधिक है, केवल वहीं पर दोनों तरफ यू "U" आकार की नाली बनाई जाए। उन गलियों में जहां एक ही तरफ आबादी है और दूसरी तरफ खेत है अथवा दोनों तरफ खेत है, वहां खेत की ओर नाली बनाये जाने की आवश्यकता नहीं है। नाली के पानी के निकास की उचित व्यवस्था कराई जाए।
इस प्रकार चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभाओं में नाली/खडन्जे का निर्माण कर लिये जाने की स्थिति में ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग पंचायती राज विभाग होगा।

4.

स्वच्छ शौचालय निर्माण - चयनित ग्रामसभाओं के सभी अभिज्ञानित पात्र एवं इच्छुक बीपीएल परिवारों तथा 10 प्रति‍शत ए0पी0 एल0  परि‍वारों को ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के अन्तर्गत सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान कार्यक्रम की गाइड लाइन्स में अनुमन्य शासकीय अनुदान से पोर फलश वाटर सील शौचालय की सुविधा प्रदान की जायेगी। शीर्ष एपीएल परिवारों को स्वयं के धन से शौचालय निर्माण हेतु कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रेरित किया जायेगा। उक्त के अतिरिक्त ग्रामसभा में स्थित शासकीय प्राथमिक एवं अपर प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों व छात्राओं के लिए सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान कार्यक्रम के अन्तर्गत अलग-अलग शौचालय इकाईयों तथा आंगनबाडी केन्द्रों के लिए बाल उपयोगी शौचालयों का निर्माण कराया जायेगा। डा० अम्बेडकर ग्रामसभा के सभी ग्रामों में इन मानकों के अनुसार स्वचछ शौचालय के निर्माण हो जाने की स्थिति में ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग पंचायती राज विभाग होगा।

5.

नि:शुल्क बोरिंग योजना - लघु सिंचाई विभाग द्वारा संतृप्तीकरण हेतु निर्धारित विभागीय मानकों के अनुसार चयनित ग्रामसभाओं में पात्र लाभार्थियों को नि:शुल्क बोरिंग की सुविधा प्रदान की जायेगी। नि:शुल्क बोरिंग का निर्माण एवं इस हेतु अनुदान समय-समय पर निर्गत विभागीय आदेशों/दिशा-निर्देशों के अनुसार डा० अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को उपलब्ध कराया जाए।
इस प्रकार चयनित सभी सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति/जनजाति के पात्र एवं इच्छुक लघु एवं सीमान्त कृषकों को नि:शुल्क  बोरिंग की व्यवस्था किये जाने पर डा० अम्बेडकर ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग लघु सिंचाई विभाग होगा।

6.

स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना - इस योजना में ग्रामीण निर्धनों के स्व-सहायता समूहों के संगठन और उनका क्षमता निर्माण, एकाधिक क्रियाकलापों का योजना निर्माण, आधारिक संरचना निर्माण, प्रौद्योगिकी, ऋण तथा विपणन आदि कार्य सम्मिलित होंगे। इस योजना के अन्तर्गत डा० अम्बेडकर ग्रामसभा को तभी संतृप्त माना जायेगा जबकि बी०पी०एल० गणना के आधार पर जो परिवार गरीबी रेखा के नीचे होंगे, उन्हें समूह में अथवा व्यक्तिगत रूप से बैंक द्वारा अनुदान/ऋण उपलब्ध कराकर रोजगार में स्थापित कराने पर ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग ग्राम्य विकास विभाग होगा।

7.

इन्दिरा आवास योजना - डा० अम्बेडकर ग्रामसभा के अन्तर्गत स्थायी सूची के आधार पर जो परिवार पात्र पाये जायेंगे, उन सभी परिवारों को इन्दिरा आवास उपलब्ध कराने पर ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग ग्राम्य विकास विभाग होगा।

8.

पेयजल सुविधा - इस योजना में नये हैण्डपम्पों की स्थापना, स्थायी रूप से खराब हैण्डपम्पों की मरम्मत (रिबोर) गुणवत्ता प्रभावित ग्रामों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा। भूजल रिचार्जिंग एवं सर्वेक्षण के पश्चात चिन्हित अनाच्छादित एवं आंशिक आच्छादित बस्तियों को आच्छादित किया जायेगा एवं पेयजल स्रोतविहीन विद्यालयों को भी पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा। चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभा के अन्तर्गत प्रति 100 की आबादी पर ग्रामसभा के समस्त मजरों/बस्तियों में एक हैण्डपम्प की स्थापना का लक्ष्य प्राप्त करना संतृप्तीकरण माना जायेगा। साथ ही यदि चयनित ग्रामसभा मानक के अनुसार गुणता प्रभावित जल से आच्छादित है, जो उक्त ग्रामसभा में वांछित क्षमता की पाइप पेयजल आपूर्ति योजना की स्थापना संतृप्तीकरण का मानक होगा। यदि चयनित ग्रामसभा में जल स्तर बहुत नीचे है, तो उक्त ग्रामसभा में उपयुक्त पेयजल व्यवस्था संतृप्तीकरण का मानक होगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग ग्राम्य विकास विभाग होगा।

9.

प्राइमरी पाठशाला की स्थापना - इस योजना में 300 की आबादी तथा एक किलोमीटर की दूरी पर एक नवीन प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की जायेगी। इस मानक के अनुसार चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभा में प्राथमिक पाठशालाओं की आवश्यकता का आंकलन किया जायेगा और तदनुसार प्राथमिक पाठशालाओं के निर्माण हो जाने की स्थिति में चयनित ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग बेसिक शिक्षा विभाग होगा।

10.

वृद्धावस्था पेंशन योजना - इस योजना के अंतर्गत चयनित ग्रामसभाओं के सभी ग्रामों में 60 वर्षो के ऊपर के निराश्रित वृद्धों एवं किसानों (जो 3.25 एकड तक की भूमि के स्वामी अथवा वार्षिक आय रू० 12000/- वाले हैं) को पात्र मानकर सभी पात्र व्यक्तियों को पेंशन प्रदान कर दिये जाने की स्थिति में चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग समाज कल्याण विभाग होगा।

11.

पति की मृत्यु के उपरांत निराश्रित महिलाओं को अनुदान - इस योजनान्तर्गत चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभा के सभी ग्रामों को सभी निराश्रित महिलाओं, जिनके पति की मृत्यु हो गयी है व जिनकी वार्षिक आय रू० 12,000/- से कम है तथा जिनके बच्चे नाबालिग हैं अथवा बालिग होने के बावजूद भरण-पोषण के लिए असमर्थ हैं, को पेंशन अनुमन्य कर दिये जाने की स्थिति में ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग होगा।

12. विकलांग कल्‍याण - 40 प्रतिशत या इससे अधिक की विकलांगता वाले सभी विकलांगो को पेंशन अनुमन्‍य किये जाने की स्थिति में चयनित ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा । 
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग विकलांग कल्‍याण विभाग होगा ।
13.

रोजगार सृजन - रोजगार गारंटी योजना/सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना : प्रदेश के 39 जनपदों में संचालित रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभा के सभी ग्राम में प्रत्येक परिवार के इच्छुक बालिग व्यक्तियों को अकुशल श्रमिक के रूप में पंजीकृत कर, उन्हें जॉब कार्ड उपलब्ध कराकर उनकी मांग के आधार पर 100 दिन का श्रमपरक रोजगार एक वित्तीय वर्ष में उपलब्ध कराये जाने की स्थिति में चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभा संतृप्त मानी जायेगी।
प्रदेश के शेष 31 जनपदों में संचालित सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के अन्तर्गत चयनित डा० अम्बेडकर ग्रामसभा के सभी ग्रामों में ग्रामीण निर्धनों (बी०पी०एल० एवं ए०पी०एल०) जो मजदूरी के अवसर/रोजगार चाहते हैं तथा जो अपने ग्राम तथा बस्ती में अथवा उसके आस-पास के क्षेत्रों में मजदूरी करने के इच्छुक हों, को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जायेंगे, जिनमें अतिनिर्धन, अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्यों तथा बाल श्रमिकों के माता-पिता को प्राथमिकता दी जायेगी। चयनित ग्रामसभा के सभी ग्रामों में सभी पात्र  एवं इच्छुक व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किये जाने की स्थिति में ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रमों का कार्यदायी विभाग ग्राम्य विकास विभाग होगा।

14 अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रवृत्ति योजना - चय नित ग्राम में कक्षा 1 से कक्षा 10 में अध्‍ययनरत अनुसूचित जाति/जनजाति के समस्‍त छात्रों को छात्रवृत्ति दिये जाने के जायेगा उपरान्‍त ही ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा । इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग समाज कल्‍याण विभाग होगा ।
15 पिछडावर्ग छात्रवृत्ति- चयनित ग्राम में ग्रामसभा में पिछडा वर्ग कल्‍याण विभाग के मानक के अनुसार पूर्ण दशम एवं दशमोत्‍तर के छात्र/छात्राओं को अनिवार्य रूप से छात्रवृत्ति दिये जाने के उपरान्‍त ही ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा ।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग पिछडा वर्ग कल्‍याण विभाग होगा ।
16 गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सामान्‍य वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति - चयनित ग्राम में ग्रामसभा में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सामान्‍य वर्ग के अभिवावकों के छात्रों को अनिवार्य रूप से छात्रवृत्ति दिये जाने के उपरान्‍त ही ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा ।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग समाज कल्‍याण विभाग होगा ।
17 अल्‍पसख्‍यक छात्रवृत्ति -चयनित ग्राम में ग्रामसभा में अल्‍पसख्‍यक कल्‍याण विभाग के मानक के अनुसार पूर्ण दशम एवं दशमोत्‍तर के छात्र/छात्राओं को अनिवार्य रूप से छात्रवृत्ति दिये जाने के उपरान्‍त ही ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा ।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग अल्‍पसख्‍यक कल्‍याण विभाग होगा ।
18 स्‍वास्‍थ्‍य उपकेन्‍द्रों का निर्माण - वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार विभागीय मानक के आधार पर स्‍थापित स्‍वास्‍थय 
उपकेन्‍द्रों से चयनित ग्रामसभा के समस्‍त्‍ ग्राम व मजरें सेवित होने पर ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा ।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण होगा ।
19 नवजात शिशुओं का टीकाकरण -चयनित ग्रामसभा में नवजात शिशुओं का टीकाकरण योजना में 0 से 5 वर्ष के बीच के बच्‍चों 
को 6 जानलेवा बीमारियों के विरूद्व किये जाने पर ही ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा ।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण होगा ।
20 पोलियो उन्‍मूलन कार्यक्रम -चयनित ग्रामसभा में 0 से 5 वर्ष के समस्‍त नवजात शिशुओं को पोलियो खुराक पिलाये जाने के पश्‍चात ही ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा । 
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण होगा ।
21 ग्रामीण क्षेत्रों में जन्‍म व म़त्‍यु दर के पंजीकरण की स्थिति -चयनित ग्रामसभा में जन्‍म म़त्‍यु अधिनियम 1969 के अन्‍तर्गत निर्धरित प्रारूप पर जन्‍म व म़त्‍यु के पंजीकरण किये जाने के पश्‍चात ही ग्रामसभा को संतृप्‍त माना जायेगा । 
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण होगा ।
22

कृषि भूमि आबंटन- चयनित डॉ0 अम्बेडकर ग्रामसभाओं में उपलब्ध कृषि योग्य भूमि को जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम,1950 (यथा संशोधित) के अंतर्गत 
निर्धारित वरीयता क्रम में, प्रथम वरीयता अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थियों को देते हुए, पात्र लाभार्थियों को भूमि के आबंटन एवं विधिवत कब्‍जा दिये जाने के उपरांत ही ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग राजस्व विभाग होगा।

23 सीलिंग से सरप्लस भूमि का आबंटन- चयनित डॉ0 अम्बेडकर ग्रामसभाओं में उपलब्ध कृषि योग्य भूमि को जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम,1950 (यथा संशोधित) के अन्तर्गत 
निर्धारित वरीयता क्रम में, प्रथम वरीयता अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थियों को देते हुए, पात्र लाभार्थियों को भूमि के आबंटन एवं विधिवत कब्‍जा दिये जाने के उपरांत ही
ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग राजस्व विभाग होगा।
24 आवासीय पटटे का आबंटन- चयनित डॉ0 अम्बेडकर ग्रामसभाओं में उपलब्ध आवास योग्य भूमि को जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम,1950 (यथा संशोधित) के अन्तर्गत 
निर्धारित वरीयता क्रम में, प्रथम वरीयता अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थियों को देते हुए, पात्र लाभार्थियों को आवासीय पटटे का आबंटन एवं विधिवत कब्‍जा दिये जाने के उपरांत ही
ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग राजस्व विभाग होगा।
25 मछली पालन हेतु पटटे का आबंटन- डॉ0 अम्बेडकर ग्रामसभा में निहित तालाबों, मीनाशयो एवं पोखरों को वरीयता क्रम के अनुसार मछुआ संप्रदाय के लोगों या उनकी समितियों को 10
वर्ष की निश्चित अवधि के लिए आबंटन किया जाए। 
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग राजस्व विभाग होगा।
26

कुम्हारीकलां हेतु पटटे का आबंटन- डॉ0 अम्बेडकर ग्रामसभा में भूमि प्रबंध समिति के अधिकार क्षेत्र एवं प्रबंध में आने वाली ऐसी भूमि जहां कुम्‍हारी कार्य हेतु उपयुक्त मिटटी उपलब्ध हो, को आसामी पटटे पर 10 वर्ष की अवधि के लिए पात्र कुम्हारों की समितियों अथवा समिति उपलब्ध न होने पर पात्र प्रजापति समुदाय को दिये जाने के पश्चात ही ग्रामसभा को संतृप्त माना जायेगा।
इस कार्यक्रम का कार्यदायी विभाग राजस्व विभाग होगा।

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